ऑस्ट्रेलिया से आया सन्देश, टूरिज़म में अव्वल बन सकता है प्रदेश


13 जून। धर्मशाला
गांव की मिट्टी की खुशबू और वतन का प्यार कुछ ऐसा होता है कि लोग दुनिया के किसी भी कोने में रहें उन्हें ये भुलाये नहीं भूलती। ये ऐसी डोर होती है जो विदेश में रहने वाले भारतीयों को अपने वतन से बांधे रहती है। ऐसे ही हैं पालमपुर के सलयाना निवासी पदम व्यास, जो विदेश में रहकर भी अपने प्रदेश की सीरत और सूरत बदलना चाहते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे पदम व्यास ने बेशक वहां की नागरिकता हासिल की है मगर उनके दिल में सिर्फ और सिर्फ हिंदुस्तान और हिमाचल बसता है। हज़ारो मील दूर रह कर उन्हें सिर्फ अपने प्रदेश, अपने जिला और अपने गांव की चिंता रहती है तभी तो व्यास आए दिन सोशल मीडिया के माध्यम से अपना सरोकार जाहिर करते रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहकर भी यह प्रदेश में पर्यटन को एक अलग पहचान दिलवाना चाहते हैं। हॉस्पिटैलिटी में 30 वर्ष से अधिक का अनुभव रखने वाले पदम् व्यास ने प्रदेश सरकार को पर्यटन के क्षेत्र में सुधार करने के साथ उसका विस्तार करने का भी सुझाव दिया है। व्यास की माने तो जिस प्रकार से दूसरे राज्यों के लोग अपनी संस्कृति और अपने पारम्परिक व्यंजनों को पर्यटकों के सामने लाते हैं उसी तरह से अगर हिमाचल प्रदेश में भी प्रयास किये जायें तो इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। इनका मानना है कि प्रदेश में हर जिले में अलग लोक संगीत है, अलग पारम्परिक व्यंजन हैं और सबसे बड़ी बात प्रदेश के हर जिले में कई ऐसे रमणीक स्थल हैं जिन्हें अगर विकसित किया जाए तो देश और विदेश से सैलानी खींचे चले आएंगे।
व्यास ने बेसुध पड़े पठानकोट-जोगिन्दरनगर रेलवे ट्रैक को भी सही ट्रैक पर लाने सुझाव दिया है। इनका कहना है कि अगर हर वीकेंड पर स्टीम इंजन के साथ डाइन कार चलाने के साथ पर्यटकों को हिमाचली पकवान परोसे जाएं, साथ ही कांगड़ा घाटी में उनके स्वागत के लिए लोक नृत्य प्रस्तुत किये जायें तो इससे पर्यटन में जबरदस्त उछाल आ सकता है।
पदम् व्यास मानना है कि प्रदेश में जड़ी बूटियों से लेकर वाइल्ड लाइफ भरपूर मात्रा में उपलब्ध है और जिस तरह से ऑस्ट्रेलिया और भारत के अन्य राज्यों में वाइल्ड सफारी शुरू की गई उसी तरह से प्रदेश में भी शुरू करनी चाहिए।
बहरहाल पदम व्यास के इन सुझावों पर अगर अमल किया जाए तो निःसन्देह प्रदेश की सूरत और सीरत दोनों बदल सकती है। 

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